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भारतीय शिक्षा प्रणाली में क्या गलत है? What is wrong in Indian education system?

शिक्षा बहुत जरूरी और बहुत कीमती है, जिसे आप सभी को पता होनी चाहिए , जैसे आप को बता दे की भारत दो शब्दों से मिलकर बना है “भा” और “रत” , “भा” का अर्थ होता है ज्ञान और “रत” का अर्थ होता है लीन रहना, अर्थात ज्ञान में लीन रहने वाला। 

भारत सदैव ध्यान में लीन रहा और इसी कारण भारत विश्व गुरु भी रहा है, ज्ञान की अधिकता और सक्रियता के कारण भारत में समुद्र विश्वविद्यालय जैसे नालंदा और तक्षशिला और कई सारे गुरुकुल हुआ करते थे, भारत में ज्ञान गुरुकुल में शिक्षा से दिया जाता था,जिसमें चिकित्सा खगोल रसायन शास्त्र भौतिक व्याकरण और जैसे कई विषय सम्मिलित हुआ करते थे। 

लेकिज आज इस अर्थ का मतलब पूरा बदल गाया है, आपको पता है, हर देश अपने पैसे का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा के क्षेत्र में खर्च करता है, लेकिन भारतीय शिक्षा प्रणाली में क्या गलत है?

मैं यह नहीं कह रही हूं कि, भारतीय शिक्षा प्रणाली खराब है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है, भारत शिक्षा प्रणाली जन समस्याओं का सामना कर रही है। उसे स्वयं सरकार सहित सभी अवगत हैं, लेकिन वे राजनीतिक में व्यस्त हैं, यहां राजनेता चुनाव में ज्यादा पैसा खर्च कर सकते हैं, लेकिन सरकारी स्कूल को फंड नहीं दे सकते हैं।

शिक्षा क्षेत्र भारत का खर्च बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद का 4.5% हो गया है, जो पहले लगभग 3.8%था, आगामी बजट में इसे और बढ़ाकर 6% कर दिया जाएगा। इसके बावजूद भारत में शिक्षा व्यवस्था इतनी अच्छी नहीं है, या केवल शिक्षा की गुणवत्ता के बारे में नहीं है बल्कि कुछ और चीजों में जहां हमारी शिक्षा प्रणाली विफल हो जाती है।

जब हम शिक्षा प्रणाली के बारे में बात करते हैं तो इसका मतलब है कि, हम प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक की शहरी और ग्रामीण शिक्षा प्रणाली पर प्रचार कर रहे हैं, हम अपने देश में शिक्षा प्रणाली के हर पहलू का विशेषण करते है।

भारतीय शिक्षा प्रणाली की समस्याओं और चुनौतियों पर आधारित इस लेख में हम भारतीय शिक्षा क्षेत्र के सामने आने वाली समस्याओं और चुनौतियों पर चर्चा करेंगे हम भारतीय शिक्षा प्रणाली से संबंध कुछ गंभीर बातो को भी बताएंगे। 

भारतीय शिक्षा प्रणाली लंबे समय से दुर्गमता और गुणवत्ता वाली शिक्षा का सामना कर रही है, जिससे भारतीय बेरोजगार हो गए है। नतीजतन, भारत के मानव संसाधन अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

किसी देश की प्रगति के लिए सबसे महत्वपूर्ण साधनों में से एक शिक्षा है, सभी भारतीय नागरिकों के हित के लिए सरकार को इस मुद्दे के समाधान के लिए निर्णयक कार्रवाई करनी चाहिए, इसलिए भारतीय शिक्षा प्रणाली की समस्याएं यूपीएससी परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक्स में से एक है। 

भारतीय की जो वर्तमान शिक्षा प्रणाली है, वह प्राचीन भारत की शिक्षा प्रणाली से मेल नहीं खाती है। भारत के वर्तमान शिक्षा प्रणाली का ढांचा और औपनिवेशक है, जब कि प्राचीन भारत की शिक्षा प्रणाली गुरुकुल आधारित थी। वर्तमान शिक्षक संशोधित एवं शिक्षा प्रणाली तो है ही यह ज्ञान-विज्ञान के विषयों को भी सम्मानित करती है। कंप्यूटर शिक्षक इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, जिसने मानव जीवन को सहज, सुंदर एवं सुविधाजनक बनाया है। 

भारतीय शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत देश में नए-नए विश्वविद्यालयों, कॉलेजों एवं स्कूल की स्थापना की गई है, और यह प्रक्रिया अनवरत जारी है। इसमें शिक्षा का प्रचार-प्रसार बढ़ाने के लिए साथ- साथ साक्षरता दर में भी बढ़ोतरी हुई है,वह 2011की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार इस समय देश की कुल साक्षरता दर 73.0 प्रतिशत है। 

वर्तमान शिक्षा प्रणाली की एक मुख्य विशेषता है कि, इसमें महिला साक्षरता की तरह विशेष ध्यान दिया गया है, महिला संस्था पढ़ने से आज समाज में महिलाओं की स्थिति सुदृढ़ हुई है। वर्तमान में महिलाओं की साक्षरता दर 64.6 प्रतिशत है। 

वर्तमान शिक्षा प्रणाली की खूबियों एवं विशेषताओं के साथ-साथ इसकी कुछ कमजोरियां भी है, जिसका हमारे समाज एवं देश पर बुरा प्रभाव दिखाई पड़ रहा है। जैसे आज संयुक्त परिवार टूटकर एकाकी परिवारों में है, और एकाकी परिवार नैनो फैमिली के रूप में विभाजित हो गए हैं। 

अब परिवारों में बड़े बुजुर्गों का स्थान घटता जा रहा है, जो बच्चों को कहानियां एवं किस्सों द्वारा नैतिक शिक्षा देते थे। दादी, नानी, की कहानियों का स्थान टीवी,कार्टून, इंटरनेट और सिनेमा ने ले लिया है, जहां से मानवीय मूल्यों की शिक्षा की उम्मीद करना बेमानी बात है। 

विद्यालयों में ऐसी शिक्षा जो बच्चों के चरित्र का निर्माण कर उनमें सामाजिक सरोकार विकसित करें उसका स्थान व्यावसायिक शिक्षा ने ले लिया है, जिसके अंतर्गत हम एक आत्मकेंद्रित सामाजिक सरकारों और मूल्यों से कटे हुए एक इंसान का निर्माण कर रहे हैं, जिससे समाज में बिखराव की स्थिति पैदा हो रही है। 

वर्तमान शिक्षा प्रणाली का एक बड़ा दोष यह भी है कि, यह रोजगारोन्मुख नहीं है, इसमें कौशल और हुनर का अभाव है, स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालय डिग्रियां बांटने वाली एजेंसी आ बनती है। 

वर्तमान शिक्षा प्रणाली का व्यवहारिक, सफल, एव आदेश स्वरूप प्रदान करने के लिए इसमें बदलाव एवं सुधार की आवश्यकता है,जिससे और जीवन को अर्थ ता प्रदान करने एवं आजीविका जुटाने से सक्षम हो सके। 

भारतीय शिक्षा प्रणाली की कुछ खामियां :

•समस्या शासन की गुणवत्ता में कमी मानी गई है। 

•भारतीय शिक्षा प्रणाली “समावेशी” नहीं है। 

•शिक्षण प्रबंधन शिक्षक की शिक्षा और प्रशिक्षण स्कूल प्रशासन और प्रबंधन के स्तर पर कमी। 

•स्कूल स्तर के आंकड़ों की अविश्वसनीयता। 

•शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) को जमीनी स्तर पर लागू न किया जाना इत्यादि। 

•अवसंरचना अवसंरचना का भाव। 

•शिक्षा संसाधनों की खराब वैश्विक रैंकिंग। 

•महंगी उच्च शिक्षा। 

•भारतीय बच्चों के लिए आधारभूत सुविधाओं की कमी। 

शिक्षा प्रणाली के बारे में निम्नलिखित कुछ बातों पर चर्चा की जिन्हें बेहतर अवसर पैदा करने के लिए बदलने की आवश्यकता है :

•शिक्षा के नाम पर जाती की लड़ाई

•सरकारी स्कूलों में शिक्षण का रवैया 

•सरकारी और निजी स्कूलों के बीच अंतर 

•शिक्षा के लिए प्रेरणा की कमी

•व्यवहारिक ज्ञान को बढ़ावा देना चाहिए 

•मूल्यांकन तकनीक बदलनी चाहिए

•काउंसलिंग कराई जाए

•शिक्षा का उद्देश समझाया जाना चाहिए

वर्तमान परिदृश्य शिक्षा प्रक्रिया के लिए एक अलग दृष्टिकोण की मांग करता है, तकनीकी ज्ञान देने और आधुनिक समय के विषयों को शिक्षण में उनके समाधान के साथ शामिल करने के लिए और अधिक प्रयास किए जाने चाहिए। 

एक छोटा सा बदलाव ना केवल बहुत बड़ा बदलाव लाएगा बल्कि है आपको और देश को विकास की ओर ले जाने के नए अवसर खोलेगा। 

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